Sunday, May 15, 2016

शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी

(भोले शंकर की जय भोले भबा की जय-4) (त्रिपुरारी की जय पालनहारी की जय-2)
भोले शंकर की जय भोले भबा की जय-2
शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी-2 हो तुम जन जन के हितकारी-2
शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी-2 (तुम जन जन के हितकारी-4)
गंगा की धार जटा में माथे पर चन्द्र कलाओं में,
गंगा की धार जटाओं में माथे पर चन्द्र कलाऔ में-2
गंगा की धार जटाओं में माथे पर चन्द्र कलाऔ में-2
 माला सर्पों की डारी-2 हो तुम जन जन के हितकारी
शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी-2 (तुम जन जन के हितकारी-4)
जब सागर मंथन होने लगा, तब काल बूट विष था निकला-4
वन गई मुसीबत भारी-2 तुम जन जन के हितकारी
शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी-2 (तुम जन जन के हितकारी-4)
देवो की करुण पुकार हुई, कैलाश पति के द्वार हुई-4
सुन भये विकल त्रिपुरारी-2 तुम जन जन के हितकारी
शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी-2 (तुम जन जन के हितकारी-4)
डम डम डम डमरू बाज उठा, अमृत देवों को दान दिया-4
शिव ऐसे पर उपकारी-2 तुम जन जन के हितकारी
शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी-2 (तुम जन जन के हितकारी-4)

हो शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी-2 (तुम जन जन के हितकारी-4)
(भोले शंकर की जय भोले भबा की जय-4) (त्रिपुरारी की जय पालनहारी की जय-2)
भोले शंकर की जय भोले भबा की जय-2

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