Sunday, May 15, 2016

हे भोले शंकर पधारो हे भोले शम्भु पधारो बैठे छुपके कहाँ

हे भोले.........................
हे भोले शंकर पधारो हे भोले शम्भु पधारो बैठे छुपके कहाँ
जटाधारी पधारो बैठे छुपके कहाँ, 
गंगा जटा में तुम्हारी हो हो हो
गंगा जटा में तुम्हारी हम प्यासे यहाँ, 
महासती के पति मेरी सुनो वंदना
हे भोले शंकर पधारो बैठे छुपके कहाँ, 
आओ मुक्ति के दाता हो हो हो
आओ मुक्ति के दाता पड़ा संकट यहाँ, 
महासती के पति बोलो छुपे हो कहाँ
हे भोले.........................
भगीरथ को गंगा प्रभु तुमने दी थी, 
सगर जी के पुत्रो को मुक्ति मिली थी
नीलकंठ महादेव हमे हे भरोसा 
इच्छा तुम्हारी बिन कुछ भी ना होता
हे भोले शम्भु पधारो हे गोरी शंकर पधारो 
किसने रोका वहां आओ भस्म रमय्या सबको त्रज के यहाँ
आओ भस्म रमय्या सबको त्रज के यहाँ, हे भोले.........................
मेरी तपस्या का फल चाहे ले लो, 
गंगाजल अब अपने भक्तो को दे दो
प्राण पखेरू कहीं प्यासा उड़ जाये ना, 
कोई तेरी करुणा पे ऊँगली उठाये ना
भिक्षा में मंगू जन कल्याण की-2 
इच्छा करो पूरी गंगा स्नान की
अब ना देर करो, आके कस्ट हरो, 
मेरी बात रख लो, मेरी लाज रख लो
हे भोले गंगधर पधारो हे भोले विषधर पधारो 
डोरी टूट जाये ना मेरा जग में नहीं कोई तेरे बिना

मेरा जग में नहीं कोई तेरे बिना, हे भोले.........................

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