संगीत............१२३
सदा शिव सर्व वरदाता
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
हरे सब दुख भक्तन के
हरे सब दुख भक्तन के
दयाकर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
संगीत............१२३
शिखर कैलाश के ऊपर
कलप तरुवर की छाया में
संगीत............१२३
शिखर कैलाश के ऊपर
कलप तरुवर की छाया में
कलप तरुवर की छाया में
रमे नित संग गिरिजा के
रमे नित संग गिरिजा के
रमण धर हो तो ऐसा हो
रमे नित संग गिरिजा के
रमण धर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
संगीत............१२३
शीश पर गंग की धारा
सुहावे भाल में लोचन
संगीत............१२३
शीश पर गंग की धारा
सुहावे भाल में लोचन
सुहावे भाल में लोचन
कला मस्तक में चंदर की
कला मस्तक में चंदर की
मनोहर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
संगीत............१२३
भयंकर जहर जब निकला
क्षीर सागर के मंथन से
संगीत............१२३
भयंकर जहर जब निकला
क्षीर सागर के मंथन से
क्षीर सागर के मंथन से
धरा सब कंठ में पीकर
धरा सब कंठ में पीकर
विषधर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
संगीत............१२३
देव नर दैत्य गण सारे
जपे नित नाम शंकर का
संगीत............१२३
देव नर दैत्य गण सारे
जपे नित नाम शंकर का
जपे नित नाम शंकर का
वो ब्रह्मानंद दुनिया में
वो ब्रह्मानंद दुनिया में
उजागर हो तो ऐसा हो
वो ब्रह्मानंद दुनिया में
उजागर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
हरे सब दुख भक्तन के
दयाकर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
दिगंबर हो तो ऐसा हो
दिगंबर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
हरे सब दुख भक्तन के
हरे सब दुख भक्तन के
दयाकर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
शिखर कैलाश के ऊपर
कलप तरुवर की छाया में
संगीत............१२३
शिखर कैलाश के ऊपर
कलप तरुवर की छाया में
कलप तरुवर की छाया में
रमे नित संग गिरिजा के
रमे नित संग गिरिजा के
रमण धर हो तो ऐसा हो
रमे नित संग गिरिजा के
रमण धर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
शीश पर गंग की धारा
सुहावे भाल में लोचन
संगीत............१२३
शीश पर गंग की धारा
सुहावे भाल में लोचन
सुहावे भाल में लोचन
कला मस्तक में चंदर की
कला मस्तक में चंदर की
मनोहर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
संगीत............१२३
भयंकर जहर जब निकला
क्षीर सागर के मंथन से
संगीत............१२३
भयंकर जहर जब निकला
क्षीर सागर के मंथन से
क्षीर सागर के मंथन से
धरा सब कंठ में पीकर
धरा सब कंठ में पीकर
विषधर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
देव नर दैत्य गण सारे
जपे नित नाम शंकर का
संगीत............१२३
देव नर दैत्य गण सारे
जपे नित नाम शंकर का
जपे नित नाम शंकर का
वो ब्रह्मानंद दुनिया में
वो ब्रह्मानंद दुनिया में
उजागर हो तो ऐसा हो
वो ब्रह्मानंद दुनिया में
उजागर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
हरे सब दुख भक्तन के
दयाकर हो तो ऐसा हो
सदा शिव सर्व वरदाता
दिगंबर हो तो ऐसा हो
दिगंबर हो तो ऐसा हो
दिगंबर हो तो ऐसा हो
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