शिव महिमा का गान करे जो, नित ले शिव का नाम -2
वो नर अंत समय में जाकर, पाता है शिव धाम
ॐ नमः शिवाय ----------------------------------------
हर हर महादेव हर हर महादेव -4
इस जगती के निर्माण का, आओ हम ध्यान करें -2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
इस जगती के निर्माण का, आओ हम ध्यान करें -2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
हर हर महादेव हर हर महादेव -4
नरसिंह रूप धरा हरी ने, और हिरणकश्यप को मारा -2
महाबली वो दैत्य अंत में नारायण से हारा
नरसिंह के उस क्रोधिती अग्नि शांत नहीं हो पाई -2
तीनो लोक में मच गई थी फिर तो त्राहि त्राहि
सभी देवता मिलकर पहुंचे, थे शिवजी के पास-2
हाथ जोड़कर बार-बार करते थे वो अरदास
ले अवतार शरभ का शिव ने, नरसिंह को निस्तेज किया
वीरभद्र ने किया समाहित (और देवों को अभय दिया-२)
हर्षित होकर देव सभी-2 , शिव का सम्मान करें
हर्षित होकर देव सभी, शिव का सम्मान करें
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय शरभ देव अवतार, जय शरभ देव अवतार-2
विश्वा नर मुनि से उनकी, पत्नी ने ये वर माँगा -2
मेरे पुत्र बने शिवजी तो, बदले भाग्य अभागा
तब विश्वा नर ने शिवजी की,घोर पापस्य की-2
शिवजी ने वरदान दिया, सब इच्छा पूरी की
पुत्र रूप में जन्मे शिवजी, गृहपति नाम धराया-2
किन्तु अल्पायु है बालक नारद ने बतलाया
इंद्र ने वर देना चाहा पर, गृहपति ने शिव जाप किया
गृहपति न माना तो इंद्र ने, (मारा बज्र अचेत किया-2 )
शिव ने किया सचेत भक्त को-------------------------------
शिव ने किया सचेत भक्त को, वर देकर अज्ञान हरे-2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय गृहपति अवतार जय गृहपति अवतार-4
सागर मंथन किया देव और, दानव ने मिलकर-2
शिव के पास गए सब कर कर, देव महा विष पाकर
शिव ने विष पिकरके सबका ही संताप हरा-2
राहु से डरे हुए चंद्र को अपने शीश धरा
अमृत पीकर देवो को जब अहंकार भर आया-2
यक्ष रूप धर कर शिवजी ने सारा अहम् मिटाया
तिनका देखर कहा की काटो, सभी देवता मिलकर
काट न पाए लाख जतन कर (मुस्काये विश्वेश्वर -2 )
शिव की माया समझ प्रभु-------------------------------
शिव की माया समझ प्रभु, चरणों में देव पड़े -2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय यक्षेश्वर अवतार जय यक्षेश्वर अवतार-4
एक समय देत्यो के भय से, इंद्र छोड़ गए इंद्रपुरी -2
उजड़ गई अमरावती सारी, वैभव से थी भरी पुरी
इंद्र पिता कश्यप को, इससे दुःख उपजा था भारी-2
देत्यो के संहार की उसने, की सारी तैयारी
कशी में शिव पूजन का, शुरू किया अभियान
दैत्य दलन का महादेव ने, दिया उन्हें वरदान
कपाली तिंगल भीम विरुपक्ष शास्त्र और विलोहित
अजिताभ शम्भु अहिदुध्न चंड, भव जन्मे रूद्र अलोकिक
कपाली---------------अजिताभ----------------------------
देत्यों का संघार किया
देत्यों का संघार किया, और देवो के संताप हरे-2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
हे कंग्रुक्ष अवतार हे कंग्रुक्ष अवतार-4
परम तपस्वी अत्री ऋषि की, पत्नी अनुसुया थी-2
पुत्र कामना हेतु उसने, कठिन तपस्या की थी
बह्मा विष्णु और शिव ने, खुश हो उनको वरदान दिये-2
अंश सभी ने अपने अपने, ऋषिवर को थे दान किये
ब्रह्मा अंश से चन्द्र हुए और दतात्रे विष्णु से-2
महा तपस्वी दुर्वासा, जन्मे शिव शम्भु से
मुनिवर दुर्वासा ने कितने किये अनोखे काम
उनकी परीक्षा से गुजरे हैं, (कभी कृष्ण कभी राम-2)
दुर्वाशा भगवान के आगे
दुर्वाशा भगवान के आगे, क्या कोई अभिमान करे-2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय दुर्वाशा अवतार, जय दुर्वाशा अवतार-6
13:23
वो नर अंत समय में जाकर, पाता है शिव धाम
ॐ नमः शिवाय ----------------------------------------
हर हर महादेव हर हर महादेव -4
इस जगती के निर्माण का, आओ हम ध्यान करें -2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
इस जगती के निर्माण का, आओ हम ध्यान करें -2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
हर हर महादेव हर हर महादेव -4
नरसिंह रूप धरा हरी ने, और हिरणकश्यप को मारा -2
महाबली वो दैत्य अंत में नारायण से हारा
नरसिंह के उस क्रोधिती अग्नि शांत नहीं हो पाई -2
तीनो लोक में मच गई थी फिर तो त्राहि त्राहि
सभी देवता मिलकर पहुंचे, थे शिवजी के पास-2
हाथ जोड़कर बार-बार करते थे वो अरदास
ले अवतार शरभ का शिव ने, नरसिंह को निस्तेज किया
वीरभद्र ने किया समाहित (और देवों को अभय दिया-२)
हर्षित होकर देव सभी-2 , शिव का सम्मान करें
हर्षित होकर देव सभी, शिव का सम्मान करें
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय शरभ देव अवतार, जय शरभ देव अवतार-2
विश्वा नर मुनि से उनकी, पत्नी ने ये वर माँगा -2
मेरे पुत्र बने शिवजी तो, बदले भाग्य अभागा
तब विश्वा नर ने शिवजी की,घोर पापस्य की-2
शिवजी ने वरदान दिया, सब इच्छा पूरी की
पुत्र रूप में जन्मे शिवजी, गृहपति नाम धराया-2
किन्तु अल्पायु है बालक नारद ने बतलाया
इंद्र ने वर देना चाहा पर, गृहपति ने शिव जाप किया
गृहपति न माना तो इंद्र ने, (मारा बज्र अचेत किया-2 )
शिव ने किया सचेत भक्त को-------------------------------
शिव ने किया सचेत भक्त को, वर देकर अज्ञान हरे-2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय गृहपति अवतार जय गृहपति अवतार-4
सागर मंथन किया देव और, दानव ने मिलकर-2
शिव के पास गए सब कर कर, देव महा विष पाकर
शिव ने विष पिकरके सबका ही संताप हरा-2
राहु से डरे हुए चंद्र को अपने शीश धरा
अमृत पीकर देवो को जब अहंकार भर आया-2
यक्ष रूप धर कर शिवजी ने सारा अहम् मिटाया
तिनका देखर कहा की काटो, सभी देवता मिलकर
काट न पाए लाख जतन कर (मुस्काये विश्वेश्वर -2 )
शिव की माया समझ प्रभु-------------------------------
शिव की माया समझ प्रभु, चरणों में देव पड़े -2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय यक्षेश्वर अवतार जय यक्षेश्वर अवतार-4
एक समय देत्यो के भय से, इंद्र छोड़ गए इंद्रपुरी -2
उजड़ गई अमरावती सारी, वैभव से थी भरी पुरी
इंद्र पिता कश्यप को, इससे दुःख उपजा था भारी-2
देत्यो के संहार की उसने, की सारी तैयारी
कशी में शिव पूजन का, शुरू किया अभियान
दैत्य दलन का महादेव ने, दिया उन्हें वरदान
कपाली तिंगल भीम विरुपक्ष शास्त्र और विलोहित
अजिताभ शम्भु अहिदुध्न चंड, भव जन्मे रूद्र अलोकिक
कपाली---------------अजिताभ----------------------------
देत्यों का संघार किया
देत्यों का संघार किया, और देवो के संताप हरे-2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
हे कंग्रुक्ष अवतार हे कंग्रुक्ष अवतार-4
परम तपस्वी अत्री ऋषि की, पत्नी अनुसुया थी-2
पुत्र कामना हेतु उसने, कठिन तपस्या की थी
बह्मा विष्णु और शिव ने, खुश हो उनको वरदान दिये-2
अंश सभी ने अपने अपने, ऋषिवर को थे दान किये
ब्रह्मा अंश से चन्द्र हुए और दतात्रे विष्णु से-2
महा तपस्वी दुर्वासा, जन्मे शिव शम्भु से
मुनिवर दुर्वासा ने कितने किये अनोखे काम
उनकी परीक्षा से गुजरे हैं, (कभी कृष्ण कभी राम-2)
दुर्वाशा भगवान के आगे
दुर्वाशा भगवान के आगे, क्या कोई अभिमान करे-2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय दुर्वाशा अवतार, जय दुर्वाशा अवतार-6
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