Saturday, October 19, 2019

दूर उस आकाश की गहराईयो मे

दूर उस आकाश की गहराइयों में 
इक नदी से बह रहे हैं आदियोगी
सून्य सन्नाटे टपकते जा रहे हैं
मौन से सब कह रहे हैं आदियोगी
योग के इस स्पर्श से अब
योगमय करना है तनमन 
सांस सास्वत सनन सननन
प्राण गुंजन घनन घननन 
उतरे मुझमें आदियोगी
योगधारा छलक छननन 
सांस सास्वत सनन सननन
प्राण गुंजन घनन घननन 
उतरे मुझमें आदियोगी, उतरे मुझमें आदियोगी

सो रहा है नृत्य अब उसको जगाओ
आदियोगी योग डमरू डगडगाओ 
सृष्टि सारी हो रही बेचैन देखो
योग वर्षा में मुझे आओ भिगाओ
प्राण घुंघरू खनखनाओ, खनक खनखन खनक खनखन
सांस सास्वत सनन सननन, प्राण गुंजन घनन घननन 
उतरे मुझमें आदियोगी, योगधारा छलत छनछन
सांस सास्वत सनन सननन, प्राण गुंजन घनन घननन 
उतरे मुझमें आदियोगी, उतरे मुझमें आदियोगी

पिस दो अस्तित्व मेरा, और कर दो चुरा चुरा
पूर्ण होने दो मुझे और, होने दो अब पूरा पूरा
भस्म वाली रश्म करदो आदियोगी
योग उत्सव रंग भर दो आदियोगी
बज उठे ये मन सितारी, झनन झननन,  झनन झननन
सांस सास्वत सनन सननन, प्राण गुंजन घनन घननन-3
उतरे मुझमें आदियोगी, योगधारा छलत छनछन
सांस सास्वत सनन सननन, प्राण गुंजन घनन घननन 
उतरे मुझमें आदियोगी, उतरे मुझमें आदियोगी


 

Friday, September 6, 2019

महादेव शंकर हैं जग से निराले

महादेव शंकर हैं जग से निराले, बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले-2
मेरे मन के मंदिर में रहते हैं शिव जी, ये मेरे नयन हैं उन्ही के शिवालय

महादेव शंकर हैं जग से निराले, बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले
मेरे मन के मंदिर में रहते हैं शिव जी, ये मेरे नयन हैं उन्ही के शिवालय
महादेव शंकर हैं जग से निराले, बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले

बनालो उन्हें अपने जीवन की आशा, सदा दूर तुमसे रहेगी निराशा-2
बिना मांगे वरदान तुमको मिलेगा, समझते हैं वो तो हर इक की मन की भाषा
वो उनके हैं जो उनको अपना बनाले, हो हो हो 

महादेव शंकर हैं जग से निराले, बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले


जिधर देखो शिव की है महिमा निराली, ये दाता है और सारी दुनिया सवाली-2
जो इस द्वार पे अपना विशवास कर ले, तो पल भर में भर जायेगी झोली खाली
उनही के अँधेरे, उनही के उजाले, हो हो हो 

महादेव शंकर हैं जग से निराले, बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले
मेरे मन के मंदिर में रहते हैं शिव जी, ये मेरे नयन हैं उन्ही के शिवालय
महादेव शंकर हैं जग से निराले, बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले
बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले...........................................

Tuesday, August 20, 2019

इस जगती के निर्माण का आओ हम ध्यान करें

शिव महिमा का गान करे जो, नित ले शिव का नाम -2
वो नर अंत समय में जाकर, पाता है शिव धाम
ॐ नमः शिवाय ----------------------------------------
हर हर महादेव हर हर महादेव -4
इस जगती के निर्माण का, आओ हम ध्यान करें -2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
इस जगती के निर्माण का, आओ हम ध्यान करें -2
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
हर हर महादेव हर हर महादेव -4

नरसिंह रूप धरा हरी ने, और हिरणकश्यप को मारा -2
महाबली वो दैत्य अंत में नारायण से हारा
नरसिंह के उस क्रोधिती अग्नि शांत नहीं हो पाई -2
तीनो लोक में मच गई थी फिर तो त्राहि त्राहि
सभी देवता मिलकर पहुंचे, थे शिवजी के पास-2
हाथ जोड़कर बार-बार करते थे वो अरदास
ले अवतार शरभ का शिव ने, नरसिंह को निस्तेज किया
वीरभद्र ने किया समाहित (और देवों को अभय दिया-२)
हर्षित होकर देव सभी-2 , शिव का सम्मान करें
हर्षित होकर देव सभी, शिव का सम्मान करें
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय शरभ देव अवतार, जय शरभ देव अवतार-2

विश्वा नर मुनि से उनकी, पत्नी ने ये वर माँगा -2 
मेरे पुत्र बने शिवजी तो, बदले भाग्य अभागा 
तब विश्वा नर ने शिवजी की,घोर पापस्य की-2 
शिवजी ने वरदान दिया, सब इच्छा पूरी की
पुत्र रूप में जन्मे शिवजी, गृहपति नाम धराया-2 
किन्तु अल्पायु है बालक नारद ने बतलाया 
इंद्र ने वर देना चाहा पर, गृहपति ने शिव जाप किया 
गृहपति न माना तो इंद्र ने, (मारा बज्र अचेत किया-2 ) 
शिव ने किया सचेत भक्त को-------------------------------
शिव ने किया सचेत भक्त को, वर देकर अज्ञान हरे-2 
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय गृहपति अवतार जय गृहपति अवतार-4

सागर मंथन किया देव और, दानव ने मिलकर-2 
शिव के पास गए सब कर कर, देव महा विष पाकर 
शिव ने विष पिकरके सबका ही संताप हरा-2 
राहु से डरे हुए चंद्र को अपने शीश धरा 
अमृत पीकर देवो को जब अहंकार भर आया-2 
यक्ष रूप धर कर शिवजी ने सारा अहम् मिटाया 
तिनका देखर कहा की काटो, सभी देवता मिलकर 
काट न पाए लाख जतन कर (मुस्काये विश्वेश्वर -2 )
शिव की माया समझ प्रभु-------------------------------
शिव की माया समझ प्रभु, चरणों में देव पड़े -2 
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
जय यक्षेश्वर अवतार जय यक्षेश्वर अवतार-4

एक समय देत्यो के भय से, इंद्र छोड़ गए इंद्रपुरी -2 
उजड़ गई अमरावती सारी, वैभव से थी भरी पुरी 
इंद्र पिता कश्यप को, इससे दुःख उपजा था भारी-2 
देत्यो के संहार की उसने, की सारी तैयारी 
कशी  में शिव पूजन का, शुरू किया अभियान 
दैत्य दलन का महादेव ने, दिया उन्हें वरदान 
कपाली तिंगल भीम विरुपक्ष शास्त्र और विलोहित 
अजिताभ शम्भु अहिदुध्न चंड, भव जन्मे रूद्र अलोकिक 
कपाली---------------अजिताभ----------------------------
देत्यों का संघार किया 
देत्यों का संघार किया, और देवो के संताप हरे-2 
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2
हे कंग्रुक्ष अवतार हे कंग्रुक्ष अवतार-4  

परम तपस्वी अत्री ऋषि की, पत्नी अनुसुया थी-2 
पुत्र कामना हेतु उसने, कठिन तपस्या की थी 
बह्मा विष्णु और शिव ने, खुश हो उनको वरदान दिये-2 
अंश सभी ने अपने अपने, ऋषिवर को थे दान किये 
ब्रह्मा अंश से चन्द्र हुए और दतात्रे विष्णु से-2 
महा तपस्वी दुर्वासा, जन्मे शिव शम्भु से 
मुनिवर दुर्वासा ने कितने किये अनोखे काम 
उनकी परीक्षा से गुजरे हैं, (कभी कृष्ण कभी राम-2)
दुर्वाशा भगवान के आगे 
दुर्वाशा भगवान के आगे, क्या कोई अभिमान करे-2 
हम आदि देव शिव के अवतारों का गुण गान करें -2

जय दुर्वाशा अवतार, जय दुर्वाशा अवतार-6

13:23
















Sunday, August 4, 2019

इक दिन वो भोले भंडारी बन करके ब्रज की नारी

इक दिन वो भोले भंडारी बन करके ब्रज की नारी, ब्रज/वृंदावन* में आ गए।
पार्वती भी मना के हारी ना माने त्रिपुरारी, ब्रज में आ गए।

पार्वती से बोले मैं भी चलूँगा तेरे संग मैं
राधा संग श्याम नाचे मैं भी नाचूँगा तेरे संग में
रास रचेगा ब्रज मैं भारी हमे दिखादो प्यारी, ब्रज में आ गए।
॥ इक दिन वो भोले भंडारी...॥

ओ मेरे भोले स्वामी, कैसे ले जाऊं अपने संग में
श्याम के सिवा वहां पुरुष ना जाए उस रास में
हंसी करेगी ब्रज की नारी मानो बात हमारी, ब्रज में आ गए।
॥ इक दिन वो भोले भंडारी...॥

ऐसा बना दो मोहे कोई ना जाने एस राज को
मैं हूँ सहेली तेरी ऐसा बताना ब्रज राज को 
बना के जुड़ा पहन के साड़ी चाल चले मतवाली, ब्रज में आ गए।
॥ इक दिन वो भोले भंडारी...॥

हंस के सत्ती ने कहा बलिहारी जाऊं इस रूप में
इक दिन तुम्हारे लिए आये मुरारी इस रूप मैं
मोहिनी रूप बनाया मुरारी अब है तुम्हारी बारी, ब्रज में आ गए।
॥ इक दिन वो भोले भंडारी...॥

देखा मोहन ने समझ गये वो सारी बात रे
ऐसी बजाई बंसी सुध बुध भूले भोलेनाथ रे
सिर से खिसक गयी जब साड़ी मुस्काये गिरधारी, ब्रज में आ गए।
॥ इक दिन वो भोले भंडारी...॥

दीनदयाल तेरा तब से गोपेश्वर हुआ नाम रे 
ओ भोले बाबा तेरा वृन्दावन बना धाम रे
भक्त कहे ओ त्रिपुरारी राखो लाज हमारी, ब्रज में आ गए।

इक दिन वो भोले भंडारी बन करके ब्रज की नारी, ब्रज में आ गए।
पार्वती भी मना के हारी ना माने त्रिपुरारी, ब्रज में आ गए।

अरे पूछे मैया शैल कुमारी कथा कहिये भोले भंडारी जी

अरे पूछे मैया शैल कुमारी कथा कहिये भोले भंडारी जी पूछे मैया शैल कुमारी कथा कहिये भोले भंडारी जी पूछे मैया शैल कुमारी कथा कहिये भोले भंडारी ज...