Tuesday, August 9, 2016

शिव शम्भू की बारात तो बड़ी सुहानी है

नमः शिवाय   नमः शिवाय   नमः शिवाय
शिव शम्भू की बारात तो बड़ी सुहानी है
महादेव की बारात तो बड़ी सुहानी है, अनुपम बाराती अदभुद वर,
सुर नर मुनि नाग यक्ष किन्नर, यहाँ त्रिभुवन का हर प्राणी है
शिव शम्भू की बारात तो बड़ी सुहानी है, शिव शम्भू की बारात तो बड़ी सुहानी है

जाने कितने युग में ये इक दिन आया
जब ब्याह करेंगे, महायोगी महामाया
हिमगिरी ने सभी को सादर न्योत बुलाया
मन में न समाये परमानंद सबआया
हर हर महादेव, शिव शिव महादेव
/नारायण की आघ्या पाकर, चले सभी बारात सजाकर
देवों दनुजो के दल न्यारे, सब के सब शिवजी के प्यारे
सबके मन उठ रही उमंगें, जैसे महासागर में तरंगे
देखेंगे नया रूप सती का, सुभ परिणय शिव पार्वती का
/कैलाश के अधिपति को लेकर, इस पर्वत से उस पर्वत पर
बारात प्रेम से जानी है
शिव शम्भू की बारात तो बड़ी सुहानी है
शिव शम्भू की बारात तो बड़ी सुहानी है

शिवजी पे विष्णु ने, व्यंग का बाण चलाया
उनको बारात से भिन्न, मलिन बताया
बोले मखमल में टाट का जोड़ लगा है
नारद जी ने निश्छल ही मुवान ठगा है
हर हर महादेव शिव शिव महादेव
व्यंग बाण सह शिव मुस्काए, भींगी भेज के गण बुलवाए
आघ्या सुन तुरंत सब आये, कर प्रणाम शिव के गुण गाये
ॐ नमः शिवाय
निज समाज लख शिव हर्षाये, और विष्णु ये सोच लजाये
जकरके हिमवान के आँगन, कम होंगे परिहास के भाजन
/वहन विचित्र वाहक विचित्र, एक से एक अद्भुद चरित्र
कुछ सोभा यहाँ बखानी है
शिव शम्भू की बारात तो बड़ी सुहानी है
शिव शम्भू की बारात तो बड़ी सुहानी है 

Thursday, May 26, 2016

शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ

शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ
अंत काल को भवसागर में उसका बेड़ापार हुआ
भोले शंकर की पूजा करो, ध्यान चरणों में इसके धरो

शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ
अंत काल को भवसागर में उसका बेड़ापार हुआ
भोले शंकर की पूजा करो, ध्यान चरणों में इसके धरो
(chorus) हरहर महादेव शिव शंभू - 4

डमरू वाला है जग में दयालु बड़ा
दीन दुखियों का दाता, जगत का पिता
डमरू वाला है जग में दयालु बड़ा
दीन दुखियों का दाता, जगत का पिता
सबपे करता है ये, भोला शंकर दया
सबको देता है ये आसरा - २
इन पावन चरणों में अर्पण आकर जो इकबार हुआ
अंत काल को भवसागर में उसका बेड़ापार हुआ
(chorus)ॐ नमः शिवाय नमो हरी ॐ नमः शिवाय नमो 
(chorus) हरहर महादेव शिव शंभू - 4

नाम ऊंचा है सबसे महादेव का
वंदना इसकी करते हैं सब देवता
नाम ऊंचा है सबसे महादेव का
वंदना इसकी करते हैं सब देवता 
इसकी पूजा से वरदान पाते हैं सब
शक्ति का दान पाते हैं सब -2
नाग असुर प्राणी सबपर ही भोले का उपकार हुआ - 2
अंत काल को भवसागर से उसका बेड़ापार हुआ

शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ
अंत काल को भवसागर में उसका बेड़ापार हुआ
भोले शंकर की पूजा करो, ध्यान चरणों में इसके धरो

(chorus) शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ
(chorus) अंत काल को भवसागर में उसका बेड़ापार हुआ
(chorus) भोले शंकर की पूजा करो, ध्यान चरणों में इसके धरो


मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा

मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा
बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुन्दरम
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाए जा
मन मेरा मंदिर...शिव मेरी पूजा...

पार्वती जब सीता बन कर, जय श्रीराम के सम्मुख आई - 
राम ने उनको 'माता' कहकर शिव शंकर की महिमा गाई
शिव भक्ति में सब कुछ सूझा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा
बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुन्दरम
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाए जा
मन मेरा मंदिर...शिव मेरी पूजा...

तेरी जटा से निकली गंगा, और गंगा ने भीष्म दिया है - २
तेरे भक्तो की शक्ती ने, सारे जग को जीत लिया है
तुझ को सब देवों ने पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा
बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुन्दरम
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाए जा

मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा
बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुन्दरम
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाए जा



चलो भोले बाबा के द्वारे सब दुःख कटेंगे तुम्हारे भोले बाबा भोले बाबा

संगीत......................१२३
चलो भोले बाबा के द्वारे 
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे
चलो भोले बाबा के द्वारे
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे
भोले बाबा भोले बाबा 
भोले बाबा भोले बाबा
भोले बाबा भोले बाबा
चलो भोले बाबा के द्वारे
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे
चलो भोले बाबा के द्वारे
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे
 
संगीत......................१२३
चढ़ा एक शिकारी देखो
विल्व वृक्ष पर करने को वो शिकार
शिव चौदस की पावन वह रात थी
अनजाने में हुआ प्रहर पूजा संस्कार
हुए बाबा प्रकट
बोले मांगो वरदान
बोले मांगो वरदान
दर्शन कर शिकारी को
हो आया वैराग्य ज्ञान
हो आया वैराग्य ज्ञान
करबद्ध कर वो बोला
हरी ओम हरी ओम 
हरी ओम हरी ओम
हरी ओम हरी ओम 
हरी ओम हरी ओम
करबद्ध कर वो बोला
दो मुझे भक्ति वरदान
दो मुझे भक्ति वरदान
बने बाबा उसके सहारे 
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे
चलो भोले बाबा के द्वारे
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे
 
संगीत......................१२३
पापा चार के कारण कष्ट सहे
कन्या सो मिनी ने
भिक्षा मांगती वो पहुंची गोकर्ण में
मिला विल्व पत्र उसे
भिक्षा के रूप में
विल्व पत्र अनजाने में
फेंका शिवलिंग पे
फेंका शिवलिंग पे
पुन्य शिवरात्रि वृत्त का 
ऐसे पाया उसने
ऐसे पाया उसने
महिमा से शिव की
हरी ओम हरी ओम 
हरी ओम हरी ओम 
हरी ओम हरी ओम 
हरी ओम हरी ओम 
महिमा से शिव की
मोक्ष पाया उसने
मोक्ष पाया उसने
बने बाबा उसके सहारे 
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे
चलो भोले बाबा के द्वारे 
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे
भोले बाबा भोले बाबा
भोले बाबा भोले बाबा
भोले बाबा भोले बाबा
चलो भोले बाबा के द्वारे
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे
चलो भोले बाबा के द्वारे
सब दुःख कटेंगे तुम्हारे

 


हे शम्भू बाबा मेरे भोले नाथ, तीनो लोक में तू ही तू

शिव नाम से है जगत में उजाला।
हरी भक्तो के है, मन में शिवाला॥

हे शम्भू बाबा मेरे भोले नाथ, तीनो लोक में तू ही तू।
श्रधा सुमन मेरा, मन बेलपत्री, जीवन भी अर्पण कर दूँ॥

जग का स्वामी है तू, अंतरयामी है तू, मेरे जीवन की अनमिट कहानी है तू।
तेरी शक्ति अपार, तेरा पावन है द्वार, तेरी पूजा ही मेरा जीवन आधार।
धुल तेरे चरणों की ले कर जीवन को साकार किया॥

मन में है कामना, कुछ मैं और जानू ना, ज़िन्दगी भर करू तेरी आराधना।
सुख की पहचान दे, तू मुझे ज्ञान दे, प्रेम सब से करूँ ऐसा वरदान दे।
तुने दिया बल निर्बल को, अज्ञानी को ज्ञान दिया॥

शिव तांडव

 ||सार्थशिवताण्डवस्तोत्रम् ||
||श्रीगणेशाय नमः ||
जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम् |
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ||||

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिम्प निर्झरी, विलो लवी चिवल्लरी विराजमान मूर्धनि |
धगद् धगद् धगज्ज्वलल् ललाट पट्ट पावके किशोर चन्द्र शेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ||||

धरा धरेन्द्र नंदिनी विलास बन्धु बन्धुरस् फुरद् दिगन्त सन्तति प्रमोद मानमानसे |
कृपा कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचिद् दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ||||

लता भुजङ्ग पिङ्गलस् फुरत्फणा मणिप्रभा कदम्ब कुङ्कुमद्रवप् रलिप्तदिग्व धूमुखे |
मदान्ध सिन्धुरस् फुरत् त्वगुत्तरीयमे दुरे मनो विनोद मद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ||||

सहस्र लोचनप्रभृत्य शेष लेखशेखर प्रसून धूलिधोरणी विधूस राङ्घ्रि पीठभूः |
भुजङ्ग राजमालया निबद्ध जाटजूटक श्रियै चिराय जायतां चकोर बन्धुशेखरः ||||

ललाट चत्वरज्वलद् धनञ्जयस्फुलिङ्गभा निपीत पञ्चसायकं नमन्निलिम्प नायकम् |
सुधा मयूखले खया विराजमानशेखरं महाकपालिसम्पदे शिरोज टालमस्तु नः ||||

कराल भाल पट्टिका धगद् धगद् धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुती कृतप्रचण्ड पञ्चसायके |
धरा धरेन्द्र नन्दिनी कुचाग्र चित्रपत्रक प्रकल्प नैक शिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ||||| 

नवीन मेघ मण्डली निरुद् धदुर् धरस्फुरत्- कुहू निशीथि नीतमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः |
निलिम्प निर्झरी धरस् तनोतु कृत्ति सिन्धुरः कला निधान बन्धुरः श्रियं जगद् धुरंधरः ||||

प्रफुल्ल नीलपङ्कज प्रपञ्च कालिम प्रभा- वलम्बि कण्ठकन्दली रुचिप्रबद्ध कन्धरम् |
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छि दांध कच्छिदं तमंत कच्छिदं भजे ||||

अखर्व सर्व मङ्गला कला कदंब मञ्जरी रस प्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् |
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्त कान्ध कान्त कं तमन्त कान्त कं भजे ||१०||

जयत् वदभ्र विभ्रम भ्रमद् भुजङ्ग मश्वस द्विनिर्ग मत् क्रमस्फुरत् कराल भाल हव्यवाट् |
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ||११||

स्पृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्- गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः |
तृष्णारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समप्रवृत्तिकः समं प्रवर्तयन्मनःकदा सदाशिवं भजे ||१२||

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन् विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् |
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ||१३||

इदम् हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् |
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ||१४||

पूजा वसान समये दशवक्त्र गीतं यः शंभु पूजन परं पठति प्रदोषे |
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः ||१५||

इति श्रीरावण- कृतम् शिव- ताण्डव- स्तोत्रम् सम्पूर्णम्

अरे पूछे मैया शैल कुमारी कथा कहिये भोले भंडारी जी

अरे पूछे मैया शैल कुमारी कथा कहिये भोले भंडारी जी पूछे मैया शैल कुमारी कथा कहिये भोले भंडारी जी पूछे मैया शैल कुमारी कथा कहिये भोले भंडारी ज...